Janpad Saharanpur | जनपद सहारनपुर | Environmental Challenges & Population Scenario | Research Book
पुस्तक का संक्षिप्त विवरण
- पुस्तक का नाम: जनपद सहारनपुर (पर्यावरणीय चुनौतियाँ एवं जनसंख्या परिदृश्य)
- लेखक: डॉ. पंकज कुमार एवं डॉ. नरेंद्र कुमार
- भाषा: हिंदी
- पुस्तक का प्रकार: Research Book
- श्रेणी: शोध / क्षेत्रीय अध्ययन
- प्रकाशक: रास्ती प्रकाशन, सहारनपुर (उ.प्र.)
- बाइंडिंग: Hardbound
- पृष्ठ: 144
- ISBN: 9788199972599
- संस्करण: 2026
- मूल्य: ₹350.00
- क्षेत्रीय फोकस: सहारनपुर, उत्तर प्रदेश
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Description
Janpad Saharanpur (जनपद सहारनपुर) | Environmental Challenges & Population Scenario | Research Book
यह पुस्तक “जनपद सहारनपुर (पर्यावरणीय चुनौतियाँ एवं जनसंख्या परिदृश्य)” क्षेत्रीय अध्ययन का एक महत्वपूर्ण और समकालीन प्रयास है। इसमें सहारनपुर की भौगोलिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक विशेषताओं के साथ-साथ तेजी से बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण और औद्योगिकीकरण के प्रभावों का संतुलित विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक पर्यावरण और जनसंख्या के आपसी संबंधों को सरल भाषा में स्पष्ट करती है तथा बदलते परिवेश में उत्पन्न समस्याओं—जैसे प्रदूषण, संसाधनों का दबाव और जीवनशैली में बदलाव—पर गंभीर चिंतन करती है। यह शोधार्थियों, विद्यार्थियों और नीति-निर्माताओं के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री सिद्ध होती है।
जनपद सहारनपुर: पर्यावरण और जनसंख्या को समझने वाली एक महत्वपूर्ण शोध पुस्तक
सहारनपुर को समझना केवल उसके भूगोल या जनसंख्या के आंकड़ों को जान लेना नहीं है। किसी भी क्षेत्र की वास्तविक तस्वीर तब सामने आती है, जब वहां के पर्यावरण, समाज, अर्थव्यवस्था, जनसंख्या और बदलते जीवन-परिवेश को एक साथ देखा जाए।
“जनपद सहारनपुर (पर्यावरणीय चुनौतियाँ एवं जनसंख्या परिदृश्य)” इसी दृष्टिकोण से तैयार की गई एक महत्वपूर्ण हिंदी शोध पुस्तक है। यह पुस्तक सहारनपुर के क्षेत्रीय परिदृश्य को समझने के लिए पर्यावरण और जनसंख्या के बीच संबंधों पर ध्यान केंद्रित करती है।
डॉ. पंकज कुमार और डॉ. नरेंद्र कुमार द्वारा लिखी गई यह पुस्तक उन पाठकों के लिए उपयोगी हो सकती है जो सहारनपुर के सामाजिक, भौगोलिक, आर्थिक और पर्यावरणीय परिवर्तनों को एक व्यवस्थित अध्ययन के रूप में समझना चाहते हैं।
सहारनपुर के बदलते परिवेश पर केंद्रित अध्ययन
आज किसी भी क्षेत्र का विकास केवल आर्थिक गतिविधियों से नहीं देखा जा सकता। बढ़ती जनसंख्या, शहरी विस्तार, औद्योगिकीकरण और संसाधनों पर बढ़ता दबाव किसी क्षेत्र के पर्यावरण और लोगों के जीवन को प्रभावित कर सकता है।
यह पुस्तक सहारनपुर के पर्यावरण और उसके बदलते जनसंख्या परिदृश्य को इसी व्यापक संदर्भ में देखने का प्रयास करती है।
पुस्तक में सहारनपुर की भौगोलिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विशेषताओं के साथ उन बदलावों पर भी चर्चा की गई है जो तेजी से बदलते क्षेत्रीय परिवेश से जुड़े हैं। पर्यावरण और जनसंख्या को अलग-अलग विषय मानने के बजाय उनके आपसी संबंधों को समझना इस पुस्तक की उपयोगिता को और बढ़ाता है।
पर्यावरणीय चुनौतियों को समझने का प्रयास
बदलती जीवनशैली और बढ़ती मानवीय गतिविधियों के साथ पर्यावरण से जुड़े प्रश्न भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं। प्रदूषण, प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव और जीवनशैली में परिवर्तन जैसे विषय आज क्षेत्रीय अध्ययन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
“जनपद सहारनपुर (पर्यावरणीय चुनौतियाँ एवं जनसंख्या परिदृश्य)” इन विषयों को सहारनपुर के संदर्भ में देखने का अवसर देती है।
यह पुस्तक पाठक को केवल समस्या बताने के बजाय पर्यावरण और जनसंख्या के बीच संबंध को समझने की दिशा में ले जाती है। इसी वजह से यह सहारनपुर पर शोध पुस्तक के रूप में विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए विशेष रुचि का विषय बन सकती है।
जनसंख्या और पर्यावरण का आपसी संबंध
किसी क्षेत्र की जनसंख्या में होने वाले परिवर्तन का असर वहां के संसाधनों, आवास, शहरी विस्तार और जीवनशैली पर दिखाई दे सकता है। दूसरी ओर, पर्यावरणीय परिस्थितियां भी लोगों के जीवन और क्षेत्रीय विकास को प्रभावित करती हैं।
इसी परस्पर संबंध को समझने के लिए जनसंख्या अध्ययन और पर्यावरणीय परिस्थितियों को साथ देखना जरूरी है।
यह पुस्तक इसी व्यापक संदर्भ को सरल और व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास करती है। इसलिए यह पर्यावरण और जनसंख्या अध्ययन में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री हो सकती है।
शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए उपयोगी
यदि आप Geography, Environmental Studies, Population Studies, Regional Studies या संबंधित विषयों में अध्ययन कर रहे हैं, तो यह पुस्तक आपके लिए उपयोगी हो सकती है।
किन पाठकों के लिए उपयोगी है?
- PhD और M.Phil. शोधार्थी
- विश्वविद्यालय और कॉलेज के विद्यार्थी
- भूगोल के विद्यार्थी
- पर्यावरण अध्ययन से जुड़े विद्यार्थी
- जनसंख्या अध्ययन के शोधार्थी
- शिक्षक और अकादमिक
- क्षेत्रीय अध्ययन में रुचि रखने वाले पाठक
- उत्तर प्रदेश के सामाजिक एवं पर्यावरणीय परिदृश्य को समझने वाले पाठक
विशेष रूप से सहारनपुर पर हिंदी पुस्तक की तलाश करने वाले पाठकों के लिए यह एक उपयोगी संदर्भ विकल्प हो सकती है।
क्यों पढ़ें यह पुस्तक?
यदि आपकी रुचि सहारनपुर के क्षेत्रीय विकास, पर्यावरणीय परिस्थितियों, जनसंख्या परिवर्तन और उनसे जुड़े सामाजिक प्रभावों को समझने में है, तो यह पुस्तक आपके अध्ययन संग्रह में एक उपयोगी स्थान बना सकती है।
यह खास तौर पर उन पाठकों के लिए उपयोगी है जो सामान्य जानकारी से आगे बढ़कर पर्यावरण, सहारनपुर जनसंख्या अध्ययन और क्षेत्रीय परिस्थितियों को एक शोधपरक संदर्भ में देखना चाहते हैं।
डॉ. पंकज कुमार और डॉ. नरेंद्र कुमार की यह पुस्तक सहारनपुर को केंद्र में रखकर पर्यावरण एवं जनसंख्या के महत्वपूर्ण पहलुओं को सामने लाती है। रास्ती प्रकाशन द्वारा प्रकाशित यह 2026 का Hardbound संस्करण शोधार्थियों, विद्यार्थियों, शिक्षकों और क्षेत्रीय अध्ययन में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए एक उपयोगी संदर्भ पुस्तक है।
लेखक और प्रकाशक संबंधी जानकारी
इस पुस्तक के लेखक डॉ. पंकज कुमार एवं डॉ. नरेंद्र कुमार हैं। पुस्तक का प्रकाशन रास्ती प्रकाशन द्वारा किया गया है।
पुस्तक की पहचान के लिए इसका ISBN 9788199972599 है। यह जानकारी शोधार्थियों, पुस्तकालयों, विद्यार्थियों और पुस्तक विक्रेताओं के लिए पुस्तक को सही संस्करण के साथ पहचानने में सहायक होती है।
Frequently Asked Questions
1. यह पुस्तक किस विषय पर है?
यह एक शोध पुस्तक है जो सहारनपुर के क्षेत्रीय परिवेश, पर्यावरणीय चुनौतियों, जनसंख्या परिदृश्य, शहरीकरण और औद्योगिकीकरण से जुड़े विषयों का अध्ययन प्रस्तुत करती है।
2. यह पुस्तक किन लोगों के लिए उपयोगी है?
यह पुस्तक शोधार्थियों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, अकादमिक पाठकों और सहारनपुर के क्षेत्रीय, पर्यावरणीय एवं जनसंख्या अध्ययन में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उपयोगी है।
3. पुस्तक किस भाषा में है?
यह पुस्तक हिंदी भाषा में प्रकाशित है।
4. इस पुस्तक के लेखक कौन हैं?
इस पुस्तक के लेखक डॉ. पंकज कुमार और डॉ. नरेंद्र कुमार हैं।
5. पुस्तक का प्रकाशक कौन है?
इस पुस्तक का प्रकाशन रास्ती प्रकाशन द्वारा किया गया है।
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